श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 3: सात्यकिके वीरोचित उद्‍गार  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  5.3.4 
नाभ्यसूयामि ते वाक्यं ब्रुवतो लाङ्गलध्वज।
ये तु शृण्वन्ति ते वाक्यं तानसूयामि माधव॥ ४॥
 
 
अनुवाद
हे मधुकुल के रत्न, जो अपनी ध्वजा पर प्रकाश चिन्ह धारण करते हैं! मैं आपकी बात में कोई दोष नहीं मानता, परन्तु जो लोग चुपचाप आपकी बात सुन रहे हैं, उन्हें मैं दोषी मानता हूँ।॥4॥
 
O jewel of the Madhukul who wears a light symbol on his flag! I am not finding fault with what you are saying, but I hold those people guilty who are quietly listening to you. ॥ 4॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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