श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 3: सात्यकिके वीरोचित उद्‍गार  »  श्लोक 12-13h
 
 
श्लोक  5.3.12-13h 
अहं तु ताञ्छितैर्बाणैरनुनीय रणे बलात्॥ १२॥
पादयो: पातयिष्यामि कौन्तेयस्य महात्मन:।
 
 
अनुवाद
मैं युद्धस्थल में तीखे बाणों से उन्हें विवश कर दूँगा और महात्मा कुन्तीनन्दन युधिष्ठिर के चरणों में गिरा दूँगा।
 
I will force them with sharp arrows in the battlefield and will make them fall at the feet of Mahatma Kuntinandan Yudhishthir.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)