श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 3: सात्यकिके वीरोचित उद्‍गार  »  श्लोक 11-12h
 
 
श्लोक  5.3.11-12h 
अनुनीता हि भीष्मेण द्रोणेन विदुरेण च॥ ११॥
न व्यवस्यन्ति पाण्डूनां प्रदातुं पैतृकं वसु।
 
 
अनुवाद
भीष्म, द्रोण और विदुर के बार-बार अनुरोध करने पर भी वह पाण्डवों को पैतृक सम्पत्ति लौटाने का कोई निर्णय या प्रयास नहीं कर रहा है ॥11 1/2॥
 
In spite of repeated requests by Bhishma, Drona and Vidura, he is not making any decision or effort to return the ancestral property to the Pandavas. ॥ 11 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)