Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.3.1: सात्यकि बोले - बलरामजी! मनुष्य के हृदय में जो कुछ होता है, वही बात उसके मुख से निकलती है। जो तुम्हारा अन्तःकरण है, वही तुम वाणी कह रहे हो॥1॥ | mahabharat अध्याय 5.3: सात्यकिके वीरोचित उद्गार । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
सात्यकिरुवाच
यादृश: पुरुषस्यात्मा तादृशं सम्प्रभाषते।
यथारूपोऽन्तरात्मा ते तथारूपं प्रभाषसे॥ १॥
अनुवाद
सात्यकि बोले - बलरामजी! मनुष्य के हृदय में जो कुछ होता है, वही बात उसके मुख से निकलती है। जो तुम्हारा अन्तःकरण है, वही तुम वाणी कह रहे हो॥1॥
Satyaki said - Balaramaji! Whatever is in a man's heart, the same thing comes out of his mouth. Whatever is your conscience, you are giving the same speech.॥ 1॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥