Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.29.7: जो विद्याएँ कर्मसिद्धि में सहायक हैं, उनके फल प्रत्यक्ष हैं, अन्य विद्याओं के नहीं। यहाँ विद्या और कर्म में कर्मफल प्रत्यक्ष हैं। प्यास से पीड़ित मनुष्य जल पीने से ही तृप्त होता है (जानने से नहीं; अतः गृहस्थाश्रम में रहते हुए शुभ कर्म करना ही श्रेष्ठ है)।॥ 7॥ | mahabharat अध्याय 5.29: संजयकी बातोंका प्रत्युत्तर देते हुए श्रीकृष्णका उसे धृतराष्ट्रके लिये चेतावनी देना । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जो विद्याएँ कर्मसिद्धि में सहायक हैं, उनके फल प्रत्यक्ष हैं, अन्य विद्याओं के नहीं। यहाँ विद्या और कर्म में कर्मफल प्रत्यक्ष हैं। प्यास से पीड़ित मनुष्य जल पीने से ही तृप्त होता है (जानने से नहीं; अतः गृहस्थाश्रम में रहते हुए शुभ कर्म करना ही श्रेष्ठ है)।॥ 7॥
The fruits of those Vidyas which help in the accomplishment of Karma are visible, not those of other Vidyas. Here, the fruits of Karma are directly visible in Vidya and Karma. A person suffering from thirst is relieved only by drinking water (not by knowing it; hence, it is best to do good deeds while living in the Grahasthashram).॥ 7॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥