अपि मे वाचं भाषमाणस्य काव्यां
धर्मारामामर्थवतीमहिंस्राम् . ।
अवेक्षेरन् धार्तराष्ट्रा: समक्षं
मां च प्राप्तं कुरव: पूजयेयु:॥ ४९॥
अनुवाद
मैं वहाँ जाकर शुक्रनीति के अनुसार धर्म और अर्थ से युक्त ऐसे वचन बोलूँगा, जिनसे हिंसा की प्रवृत्ति का दमन हो जाएगा। क्या धृतराष्ट्र के पुत्र मेरी बातों पर ध्यान देंगे? क्या कौरव मेरे समक्ष उपस्थित होने पर मेरा आदर करेंगे?॥ 49॥
I will go there and speak such words which are full of Dharma and Artha as per the Sukraniti, which will suppress the tendency of violence. Will the sons of Dhritarashtra pay heed to my words? Will the Kauravas respect me when I appear before them?॥ 49॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥