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mahabharat 5.29.39: दु:शासन ने मर्यादा के विरुद्ध द्रौपदी को उसके ससुराल वालों के सामने घसीट लिया। द्रौपदी वहाँ गई और दयनीय दृष्टि से चारों ओर देखने लगी, किन्तु विदुरजी के अतिरिक्त उसे अपनी रक्षा करने वाला कोई नहीं मिला।   |   mahabharat अध्याय 5.29: संजयकी बातोंका प्रत्युत्तर देते हुए श्रीकृष्णका उसे धृतराष्ट्रके लिये चेतावनी देना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 29: संजयकी बातोंका प्रत्युत्तर देते हुए श्रीकृष्णका उसे धृतराष्ट्रके लिये चेतावनी देना  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  5.29.39 
दु:शासन: प्रातिलोम्यान्निनाय
सभामध्ये श्वशुराणां च कृष्णाम्।
सा तत्र नीता करुणं व्यपेक्ष्य
नान्यं क्षत्तुर्नाथमवाप किंचित्॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
दु:शासन ने मर्यादा के विरुद्ध द्रौपदी को उसके ससुराल वालों के सामने घसीट लिया। द्रौपदी वहाँ गई और दयनीय दृष्टि से चारों ओर देखने लगी, किन्तु विदुरजी के अतिरिक्त उसे अपनी रक्षा करने वाला कोई नहीं मिला।
 
Dushasan, against the decorum, dragged Draupadi into the court before her in-laws. Draupadi went there and looked around in a pitiful manner, but she found no one to protect her except Vidurji.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)