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mahabharat 5.29.37: पाण्डवों की प्रिय पत्नी, पतिव्रता और सदाचारिणी, यशस्वी द्रौपदी जब रजस्वला अवस्था में सभा में लाई जा रही थी, तब भीष्म आदि प्रमुख कौरवों ने भी उसके प्रति उदासीनता दिखाई ॥ 37॥   |   mahabharat अध्याय 5.29: संजयकी बातोंका प्रत्युत्तर देते हुए श्रीकृष्णका उसे धृतराष्ट्रके लिये चेतावनी देना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 29: संजयकी बातोंका प्रत्युत्तर देते हुए श्रीकृष्णका उसे धृतराष्ट्रके लिये चेतावनी देना  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  5.29.37 
प्रियां भार्यां द्रौपदीं पाण्डवानां
यशस्विनीं शीलवृत्तोपपन्नाम्।
यदुपैक्षन्त कुरवो भीष्ममुख्या:
कामानुगेनोपरुद्धां व्रजन्तीम्॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
पाण्डवों की प्रिय पत्नी, पतिव्रता और सदाचारिणी, यशस्वी द्रौपदी जब रजस्वला अवस्था में सभा में लाई जा रही थी, तब भीष्म आदि प्रमुख कौरवों ने भी उसके प्रति उदासीनता दिखाई ॥ 37॥
 
The Pandavas' beloved wife, glorious Draupadi, who was endowed with chastity and good conduct, was being brought into the assembly in her menstruating state, but even the leading Kauravas, including Bhishma, showed indifference towards her. ॥ 37॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)