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mahabharat 5.29.35: सूत! यदि हम इस राज्य के लिए युद्ध करते हुए मारे भी जाएँ, तो भी वह हमारे लिए वांछनीय है। हमारे पूर्वजों का राज्य अन्य लोगों के राज्य से श्रेष्ठ है। संजय! तुम्हें राजाओं के ये प्राचीन कर्तव्य राजाओं की सभा में कौरवों को सुनाने चाहिए। 35।   |   mahabharat अध्याय 5.29: संजयकी बातोंका प्रत्युत्तर देते हुए श्रीकृष्णका उसे धृतराष्ट्रके लिये चेतावनी देना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 29: संजयकी बातोंका प्रत्युत्तर देते हुए श्रीकृष्णका उसे धृतराष्ट्रके लिये चेतावनी देना  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  5.29.35 
अस्मिन् पदे युध्यतां नो वधोऽपि
श्लाघ्य: पित्र्यं परराज्याद् विशिष्टम्।
एतान् धर्मान् कौरवाणां पुराणा-
नाचक्षीथा: संजय राजमध्ये॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
सूत! यदि हम इस राज्य के लिए युद्ध करते हुए मारे भी जाएँ, तो भी वह हमारे लिए वांछनीय है। हमारे पूर्वजों का राज्य अन्य लोगों के राज्य से श्रेष्ठ है। संजय! तुम्हें राजाओं के ये प्राचीन कर्तव्य राजाओं की सभा में कौरवों को सुनाने चाहिए। 35।
 
Suta! If we are killed while fighting for this kingdom, even that is desirable for us. The kingdom of our forefathers is better than the kingdom of others. Sanjay! You should narrate these ancient duties of kings to the Kauravas in the assembly of kings. 35.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)