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श्लोक  5.29.30 
इन्द्रेणैतद् दस्युवधाय कर्म
उत्पादितं वर्म शस्त्रं धनुश्च॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
देवराज इन्द्र ने स्वयं ऐसे लुटेरों को मारने के लिए कवच, शस्त्र और धनुष का आविष्कार किया था।
 
Devaraj Indra himself invented armour, arms and bow to kill such robbers. 30.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)