श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 29: संजयकी बातोंका प्रत्युत्तर देते हुए श्रीकृष्णका उसे धृतराष्ट्रके लिये चेतावनी देना  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  5.29.28 
श्रेयांस्तस्माद् यदि विद्येत कश्चि-
दभिज्ञात: सर्वधर्मोपपन्न:।
स तं द्रष्टुमनुशिष्यात् प्रजानां
न चैतद् बुध्येदिति तस्मिन्नसाधु:॥ २८॥
 
 
अनुवाद
यदि राजा को यह पता चले कि मेरे राज्य में कोई सम्पूर्ण धर्मों से संपन्न महापुरुष निवास करता है तो उसे चाहिए कि वह उसे प्रजा के गुण-दोषों का निरीक्षण करने के लिए नियुक्त करे और उसके द्वारा यह पता लगाए कि मेरे राज्य में कोई पापी तो नहीं है॥ 28॥
 
If the king comes to know that a great man who is endowed with all the religious principles lives in his kingdom then he should appoint him to inspect the virtues and defects of the subjects and through him he should find out whether there is any sinner in his kingdom.॥ 28॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)