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mahabharat 5.29.26: शूद्र को ब्राह्मणों की सेवा और पूजा करनी चाहिए, स्वयं वेदों का अध्ययन नहीं करना चाहिए। उसके लिए यज्ञ भी निषिद्ध है। उसे सदैव परिश्रमी और आलस्य से रहित होकर अपने कल्याण के लिए प्रयत्नशील रहना चाहिए। इस प्रकार शूद्रों का प्राचीन धर्म बताया गया है। 26॥   |   mahabharat अध्याय 5.29: संजयकी बातोंका प्रत्युत्तर देते हुए श्रीकृष्णका उसे धृतराष्ट्रके लिये चेतावनी देना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 29: संजयकी बातोंका प्रत्युत्तर देते हुए श्रीकृष्णका उसे धृतराष्ट्रके लिये चेतावनी देना  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  5.29.26 
परिचर्या वन्दनं ब्राह्मणानां
नाधीयीत प्रतिषिद्धोऽस्य यज्ञ:।
नित्योत्थितो भूतयेऽतन्द्रित: स्या-
देवं स्मृत: शूद्रधर्म: पुराण:॥ २६॥
 
 
अनुवाद
शूद्र को ब्राह्मणों की सेवा और पूजा करनी चाहिए, स्वयं वेदों का अध्ययन नहीं करना चाहिए। उसके लिए यज्ञ भी निषिद्ध है। उसे सदैव परिश्रमी और आलस्य से रहित होकर अपने कल्याण के लिए प्रयत्नशील रहना चाहिए। इस प्रकार शूद्रों का प्राचीन धर्म बताया गया है। 26॥
 
A Shudra should serve and worship Brahmins and not study the Vedas on his own. Yagya is also prohibited for him. He should always strive for his welfare by being industrious and free from laziness. In this way the ancient religion of Shudras has been described. 26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)