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mahabharat 5.29.22: संजय! तुम पहले ब्राह्मण आदि चारों वर्णों के विभाग और उनके अपने-अपने कर्तव्यों को देखो। फिर पाण्डवों के वर्तमान कर्मों को देखो; तत्पश्चात् अपनी इच्छानुसार उनकी स्तुति या निन्दा करो। 22॥   |   mahabharat अध्याय 5.29: संजयकी बातोंका प्रत्युत्तर देते हुए श्रीकृष्णका उसे धृतराष्ट्रके लिये चेतावनी देना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 29: संजयकी बातोंका प्रत्युत्तर देते हुए श्रीकृष्णका उसे धृतराष्ट्रके लिये चेतावनी देना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  5.29.22 
चातुर्वर्ण्यस्य प्रथमं संविभाग-
मवेक्ष्य त्वं संजय स्वं च कर्म।
निशम्याथो पाण्डवानां च कर्म
प्रशंस वा निन्द वा या मतिस्ते॥ २२॥
 
 
अनुवाद
संजय! तुम पहले ब्राह्मण आदि चारों वर्णों के विभाग और उनके अपने-अपने कर्तव्यों को देखो। फिर पाण्डवों के वर्तमान कर्मों को देखो; तत्पश्चात् अपनी इच्छानुसार उनकी स्तुति या निन्दा करो। 22॥
 
Sanjay! You first look at the divisions of the four varnas like Brahmin and the respective duties of each of them. Then look at the present actions of the Pandavas; After that, praise or criticize them as per your opinion. 22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)