Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.29.21: यदि आप शांति बनाए रखना ही सर्वोत्तम मानते हैं, तो मुझे बताइए, क्या राजा का धर्म युद्ध में भागकर या युद्ध से भागकर सही ढंग से निभाया जाता है? क्षत्रिय धर्म का विचार करते हुए आप जो भी कहेंगे, मैं उसे सुनने के लिए तैयार हूँ। | mahabharat अध्याय 5.29: संजयकी बातोंका प्रत्युत्तर देते हुए श्रीकृष्णका उसे धृतराष्ट्रके लिये चेतावनी देना । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
उताहो त्वं मन्यसे शाम्यमेव
राज्ञां युद्धे वर्तते धर्मतन्त्रम्।
अयुद्धे वा वर्तते धर्मतन्त्रं
तथैव ते वाचमिमां शृणोमि॥ २१॥
अनुवाद
यदि आप शांति बनाए रखना ही सर्वोत्तम मानते हैं, तो मुझे बताइए, क्या राजा का धर्म युद्ध में भागकर या युद्ध से भागकर सही ढंग से निभाया जाता है? क्षत्रिय धर्म का विचार करते हुए आप जो भी कहेंगे, मैं उसे सुनने के लिए तैयार हूँ।
If you think that maintaining peace is the best option, then tell me, is the Dharma of a king followed properly by engaging in war or by fleeing away from the war? I am ready to listen to whatever you say while considering the Kshatriya Dharma.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥