Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.29.10: चन्द्रमा भी आलस्य को त्यागकर (स्वयं कर्म द्वारा) मास, पक्ष और नक्षत्रों का संयोग प्राप्त करता है; उसी प्रकार जातवेद (अग्निदेव) भी आलस्य न करके प्रजा का कार्य करते हुए स्वयं प्रज्वलित होकर दाहकर्म को पूर्ण करता है॥10॥ | mahabharat अध्याय 5.29: संजयकी बातोंका प्रत्युत्तर देते हुए श्रीकृष्णका उसे धृतराष्ट्रके लिये चेतावनी देना । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
चन्द्रमा भी आलस्य को त्यागकर (स्वयं कर्म द्वारा) मास, पक्ष और नक्षत्रों का संयोग प्राप्त करता है; उसी प्रकार जातवेद (अग्निदेव) भी आलस्य न करके प्रजा का कार्य करते हुए स्वयं प्रज्वलित होकर दाहकर्म को पूर्ण करता है॥10॥
The moon also gives up laziness (through action itself) and attains the conjunction of months, pakshas and constellations; Similarly, Jatveda (Agnidev) too, without being lazy, ignites itself while working for the people and completes the cremation. 10॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥