यत्राधर्मो धर्मरूपाणि धत्ते
धर्म: कृत्स्नो दृश्यतेऽधर्मरूप:।
बिभ्रद् धर्मो धर्मरूपं तथा च
विद्वांसस्तं सम्प्रपश्यन्ति बुद्धॺा॥ २॥
अनुवाद
कभी अधर्म ही धर्म का रूप धारण कर लेता है, कभी धर्म ही पूर्णतः अधार्मिक प्रतीत होता है और कभी धर्म अपना वास्तविक स्वरूप धारण कर लेता है। विद्वान पुरुष अपनी बुद्धि से विचार करके उसके वास्तविक स्वरूप को देखते और समझते हैं॥2॥
Sometimes irreligion takes the form of religion, sometimes religion itself appears completely irreligious and sometimes religion maintains its true form. The learned men, by thinking with their intellect, see and understand its true form.॥2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥