Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.27.4: नरेन्द्र! धर्माचरण में विघ्नों का मूल कारण जो कामनाएँ हैं, वे ही प्रत्येक मनुष्य को अपनी ओर खींचती हैं। अतः बुद्धिमान् पुरुष पहले उन कामनाओं का नाश करता है और फिर जगत् की शुद्ध प्रशंसा प्राप्त करता है॥4॥ | mahabharat अध्याय 5.27: संजयका युधिष्ठिरको युद्धमें दोषकी सम्भावना बतलाकर उन्हें युद्धसे उपरत करनेका प्रयत्न करना । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
नरेन्द्र! धर्माचरण में विघ्नों का मूल कारण जो कामनाएँ हैं, वे ही प्रत्येक मनुष्य को अपनी ओर खींचती हैं। अतः बुद्धिमान् पुरुष पहले उन कामनाओं का नाश करता है और फिर जगत् की शुद्ध प्रशंसा प्राप्त करता है॥4॥
Narendra! The desires which are the root cause of obstacles in the practice of Dharma pull every human being towards themselves. Therefore, a wise person first destroys those desires and then gets the pure praise of the world.॥ 4॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥