Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.27.26: हे राजन! समुद्रपर्यन्त सम्पूर्ण पृथ्वी को प्राप्त करके भी आप जरा-मृत्यु, रुचि-अरुचि, सुख-दुःख से नहीं बच सकते। आप इन सब बातों को भली-भाँति जानते हैं; अतः मैं आपसे प्रार्थना करता हूँ कि आप युद्ध न करें॥ 26॥ | mahabharat अध्याय 5.27: संजयका युधिष्ठिरको युद्धमें दोषकी सम्भावना बतलाकर उन्हें युद्धसे उपरत करनेका प्रयत्न करना । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
लब्ध्वापीमां पृथिवीं सागरान्तां
जरामृत्यू नैव हि त्वं प्रजह्या:।
प्रियाप्रिये सुखदु:खे च राज-
न्नेवं विद्वान् नैव युद्धं कुरु त्वम्॥ २६॥
अनुवाद
हे राजन! समुद्रपर्यन्त सम्पूर्ण पृथ्वी को प्राप्त करके भी आप जरा-मृत्यु, रुचि-अरुचि, सुख-दुःख से नहीं बच सकते। आप इन सब बातों को भली-भाँति जानते हैं; अतः मैं आपसे प्रार्थना करता हूँ कि आप युद्ध न करें॥ 26॥
O King! Even after having acquired the whole earth up to the sea, you cannot escape from old age and death, likes and dislikes, and pleasure and pain. You know all these things very well; hence I request you not to fight.॥ 26॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥