Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.27.22: हे कुन्तीपुत्र! तुम्हारी बुद्धि कभी किसी पापकर्म में प्रवृत्त नहीं होती और क्रोध में भी तुमने कभी कोई पाप नहीं किया है। अतः बताओ, वह कौन-सा (प्रबल) कारण है जिसके कारण तुम अब अपनी बुद्धि के विरुद्ध यह पापकर्म युद्ध करना चाहते हो?॥ 22॥ | mahabharat अध्याय 5.27: संजयका युधिष्ठिरको युद्धमें दोषकी सम्भावना बतलाकर उन्हें युद्धसे उपरत करनेका प्रयत्न करना । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हे कुन्तीपुत्र! तुम्हारी बुद्धि कभी किसी पापकर्म में प्रवृत्त नहीं होती और क्रोध में भी तुमने कभी कोई पाप नहीं किया है। अतः बताओ, वह कौन-सा (प्रबल) कारण है जिसके कारण तुम अब अपनी बुद्धि के विरुद्ध यह पापकर्म युद्ध करना चाहते हो?॥ 22॥
Kunti's son! Your intellect is never involved in any wrongdoing and you have never committed any sin even in anger. So tell me, what is the (strong) reason due to which you now want to commit this sinful act of war against your intellect?॥ 22॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥