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mahabharat 5.27.20: हे पाण्डुपुत्र! फिर क्या कारण है कि आपने शत्रु को बलवान होने का अवसर दिया? आपने अपने समर्थकों को दुर्बल क्यों किया और बारह वर्षों तक वन में क्यों रहे? फिर आज जब वह अनुकूल समय बीत गया है, तो आप युद्ध क्यों करना चाहते हैं?॥20॥   |   mahabharat अध्याय 5.27: संजयका युधिष्ठिरको युद्धमें दोषकी सम्भावना बतलाकर उन्हें युद्धसे उपरत करनेका प्रयत्न करना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.27.20 
बलं कस्माद् वर्धयित्वा परस्य
निजान् कस्मात् कर्शयित्वा सहायान्।
निरुष्य कस्माद् वर्षपूगान् वनेषु
युयुत्ससे पाण्डव हीनकालम्॥ २०॥
 
 
अनुवाद
हे पाण्डुपुत्र! फिर क्या कारण है कि आपने शत्रु को बलवान होने का अवसर दिया? आपने अपने समर्थकों को दुर्बल क्यों किया और बारह वर्षों तक वन में क्यों रहे? फिर आज जब वह अनुकूल समय बीत गया है, तो आप युद्ध क्यों करना चाहते हैं?॥20॥
 
O son of Pandu! Then what is the reason that you gave the enemy an opportunity to grow stronger? Why did you weaken your supporters and why did you live in the forest for twelve years? Then today, when that favorable time has passed, why do you wish to fight?॥20॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)