Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.27.2: अजातशत्रु! यदि कौरव बिना युद्ध किए तुम्हें तुम्हारा राज्य-भाग न दें, तो मैं समझता हूँ कि अन्धक और वृष्णिवंशी क्षत्रियों के राज्य में भिक्षावृत्ति करके तुम्हारा निर्वाह करना ही श्रेयस्कर है; किन्तु युद्ध करके राज्य लेना मैं अच्छा नहीं समझता॥ 2॥ | mahabharat अध्याय 5.27: संजयका युधिष्ठिरको युद्धमें दोषकी सम्भावना बतलाकर उन्हें युद्धसे उपरत करनेका प्रयत्न करना । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न चेद् भागं कुरवोऽन्यत्र युद्धात्
प्रयच्छेरंस्तुभ्यमजातशत्रो।
भैक्षचर्यामन्धकवृष्णिराज्ये
श्रेयो मन्ये न तु युद्धेन राज्यम्॥ २॥
अनुवाद
अजातशत्रु! यदि कौरव बिना युद्ध किए तुम्हें तुम्हारा राज्य-भाग न दें, तो मैं समझता हूँ कि अन्धक और वृष्णिवंशी क्षत्रियों के राज्य में भिक्षावृत्ति करके तुम्हारा निर्वाह करना ही श्रेयस्कर है; किन्तु युद्ध करके राज्य लेना मैं अच्छा नहीं समझता॥ 2॥
Ajatashatru! If the Kauravas do not give you your share of the kingdom without a fight, I think it is better for you to live by begging in the kingdom of the Andhaka and Vrishni clan Kshatriyas; but I do not think it is good to take the kingdom by fighting.॥ 2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥