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mahabharat 5.27.17: पहले (जुए के समय) हम इन्हें बलपूर्वक अपने अधीन करके वन में न जाकर यहीं रह सकते थे; क्योंकि आज जो सेना इकट्ठी हुई है, वह तो पहले भी हमारे ही लोगों के अधीन थी और ये भगवान श्रीकृष्ण तथा वीर सात्यकि सदैव (प्रेमवश) आपके अधीन रहे हैं और आपके सहायक रहे हैं।   |   mahabharat अध्याय 5.27: संजयका युधिष्ठिरको युद्धमें दोषकी सम्भावना बतलाकर उन्हें युद्धसे उपरत करनेका प्रयत्न करना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 27: संजयका युधिष्ठिरको युद्धमें दोषकी सम्भावना बतलाकर उन्हें युद्धसे उपरत करनेका प्रयत्न करना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  5.27.17 
अप्रव्रज्येमा स्म हित्वाऽऽपुरस्ता-
दात्माधीनं यद् बलं ह्येतदासीत्।
नित्यं च वश्या: सचिवास्तवेमे
जनार्दनो युयुधानश्च वीर:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
पहले (जुए के समय) हम इन्हें बलपूर्वक अपने अधीन करके वन में न जाकर यहीं रह सकते थे; क्योंकि आज जो सेना इकट्ठी हुई है, वह तो पहले भी हमारे ही लोगों के अधीन थी और ये भगवान श्रीकृष्ण तथा वीर सात्यकि सदैव (प्रेमवश) आपके अधीन रहे हैं और आपके सहायक रहे हैं।
 
Earlier (at the time of gambling) we could have kept them under our control by force and stayed here without going to the forest; because the army that has gathered today was under the control of our own people even earlier and these Lord Krishna and the valiant Satyaki have always been under your control (due to love) and have been your helpers.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)