Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.27.15: इस प्रकार (ज्ञानरूपी अग्नि से) कर्मों को जलाकर, मनुष्य को सत्य, संयम, सरलता और दया आदि गुणों का त्याग नहीं करना चाहिए। अश्वमेध, राजसूय आदि यज्ञों का भी त्याग नहीं करना चाहिए, किन्तु युद्ध जैसे पापकर्म के निकट भी नहीं जाना चाहिए।॥15॥ | mahabharat अध्याय 5.27: संजयका युधिष्ठिरको युद्धमें दोषकी सम्भावना बतलाकर उन्हें युद्धसे उपरत करनेका प्रयत्न करना । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अन्तं गत्वा कर्मणां मा प्रजह्या:
सत्यं दमं चार्जवमानृशंस्यम्।
अश्वमेधं राजसूयं तथेज्या:
पापस्यान्तं कर्मणो मा पुनर्गा:॥ १५॥
अनुवाद
इस प्रकार (ज्ञानरूपी अग्नि से) कर्मों को जलाकर, मनुष्य को सत्य, संयम, सरलता और दया आदि गुणों का त्याग नहीं करना चाहिए। अश्वमेध, राजसूय आदि यज्ञों का भी त्याग नहीं करना चाहिए, किन्तु युद्ध जैसे पापकर्म के निकट भी नहीं जाना चाहिए।॥15॥
Having burnt the karmas in this manner (with the fire of knowledge), one should never give up the virtues of truth, self-control, simplicity and kindness. One should also not give up performing Ashwamedha, Rajasuya and other sacrifices, but one should never again go near a sinful act like war.॥15॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥