Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.27.12: कुन्ती नंदन! कोई भी शुभ कर्म इस शरीर में जीवित रहते हुए ही किया जा सकता है। मृत्यु के बाद कोई भी कर्म नहीं किया जा सकता। आपने परलोक में सुख देने वाला महान पुण्य कर्म किया है, जिसकी स्तुति संतों ने की है॥12॥ | mahabharat अध्याय 5.27: संजयका युधिष्ठिरको युद्धमें दोषकी सम्भावना बतलाकर उन्हें युद्धसे उपरत करनेका प्रयत्न करना । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
इह क्षेत्रे क्रियते पार्थ कार्यं
न वै किञ्चित् क्रियते प्रेत्य कार्यम्।
कृतं त्वया पारलौक्यं च कर्म
पुण्यं महत् सद्भिरतिप्रशस्तम्॥ १२॥
अनुवाद
कुन्ती नंदन! कोई भी शुभ कर्म इस शरीर में जीवित रहते हुए ही किया जा सकता है। मृत्यु के बाद कोई भी कर्म नहीं किया जा सकता। आपने परलोक में सुख देने वाला महान पुण्य कर्म किया है, जिसकी स्तुति संतों ने की है॥12॥
Kunti Nandan! Any good deed can be done only while you are alive in this body. No work can be done after death. You have done a great good deed which will give happiness in the next world, which has been praised by the saints.॥ 12॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥