Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.26.9: राजा धृतराष्ट्र स्वयं विषम आचरण में लगे हुए हैं; किन्तु वे दूसरों में सम आचरण देखना चाहते हैं, यह अच्छी बात नहीं है। उन्हें दूसरों के आचरण को उसी प्रकार देखना चाहिए, जिस प्रकार वे अपने आचरण को देखते हैं।॥9॥ | mahabharat अध्याय 5.26: युधिष्ठिरका संजयको इन्द्रप्रस्थ लौटानेसे ही शान्ति होना सम्भव बतलाना । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स्वयं राजा विषमस्थ: परेषु
सामस्थ्यमन्विच्छति तन्न साधु।
यथाऽऽत्मन: पश्यति वृत्तमेव
तथा परेषामपि सोऽभ्युपैतु॥ ९॥
अनुवाद
राजा धृतराष्ट्र स्वयं विषम आचरण में लगे हुए हैं; किन्तु वे दूसरों में सम आचरण देखना चाहते हैं, यह अच्छी बात नहीं है। उन्हें दूसरों के आचरण को उसी प्रकार देखना चाहिए, जिस प्रकार वे अपने आचरण को देखते हैं।॥9॥
King Dhritarashtra himself is engaged in unequal behaviour; but he wants to see equal behaviour in others, this is not a good thing. He should see the behaviour of others in the same way as he sees his own behaviour.॥ 9॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥