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श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 26: युधिष्ठिरका संजयको इन्द्रप्रस्थ लौटानेसे ही शान्ति होना सम्भव बतलाना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  5.26.6 
सम्पश्येमं भोगचयं महान्तं
सहास्माभिर्धृतराष्ट्रस्य राज्ञ:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
राजा धृतराष्ट्र ने हमारे साथ मिलकर अपार सुखों का संचय किया है। परन्तु देखो, (इतना सब होने पर भी वे तृप्त नहीं हैं)।
 
King Dhritarashtra, along with us, has accumulated a huge amount of pleasures. But look (even after all this they are not satisfied).
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)