Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.26.4: हम केवल उसी सुख को चाहते हैं जो हमें धर्म की प्राप्ति में सहायक हो। जो मनुष्य इन्द्रियों को सुख देने वाले सुखों और विषयों का अनुसरण करता है, वह सुख प्राप्ति और दुःख का नाश करने की इच्छा से कर्म करता है; किन्तु वास्तव में उसके सभी कर्म दुःखरूप ही होते हैं; क्योंकि वे दुःखदायी साधनों से ही प्राप्त होते हैं॥4॥ | mahabharat अध्याय 5.26: युधिष्ठिरका संजयको इन्द्रप्रस्थ लौटानेसे ही शान्ति होना सम्भव बतलाना । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हम केवल उसी सुख को चाहते हैं जो हमें धर्म की प्राप्ति में सहायक हो। जो मनुष्य इन्द्रियों को सुख देने वाले सुखों और विषयों का अनुसरण करता है, वह सुख प्राप्ति और दुःख का नाश करने की इच्छा से कर्म करता है; किन्तु वास्तव में उसके सभी कर्म दुःखरूप ही होते हैं; क्योंकि वे दुःखदायी साधनों से ही प्राप्त होते हैं॥4॥
We want only that happiness which helps us to attain Dharma. He who follows the pleasures and objects which are pleasing to the senses, acts with the desire to obtain pleasure and destroy pain; but in reality all his actions are in the form of pain only; because they are achieved only by painful means.॥ 4॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥