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mahabharat 5.26.28: संजय! तुम अच्छी तरह जानते हो कि पूर्वकाल में कौरवों के कारण हमें कितना कष्ट सहना पड़ा था, तथापि तुम्हारे आदर के कारण मैं उनके सब अपराधों को क्षमा कर सकता हूँ। दुर्योधन आदि कौरवों ने पूर्वकाल में हमारे साथ कैसा व्यवहार किया है और उस समय हमने उनके साथ कैसा व्यवहार किया था, यह भी तुमसे छिपा नहीं है॥ 28॥   |   mahabharat अध्याय 5.26: युधिष्ठिरका संजयको इन्द्रप्रस्थ लौटानेसे ही शान्ति होना सम्भव बतलाना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 26: युधिष्ठिरका संजयको इन्द्रप्रस्थ लौटानेसे ही शान्ति होना सम्भव बतलाना  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  5.26.28 
जानासि त्वं क्लेशमस्मासु वृत्तं
त्वां पूजयन् संजयाहं क्षमेयम्।
यच्चास्माकं कौरवैर्भूतपूर्वं
या नो वृत्तिर्धार्तराष्ट्रे तदाऽऽसीत्॥ २८॥
 
 
अनुवाद
संजय! तुम अच्छी तरह जानते हो कि पूर्वकाल में कौरवों के कारण हमें कितना कष्ट सहना पड़ा था, तथापि तुम्हारे आदर के कारण मैं उनके सब अपराधों को क्षमा कर सकता हूँ। दुर्योधन आदि कौरवों ने पूर्वकाल में हमारे साथ कैसा व्यवहार किया है और उस समय हमने उनके साथ कैसा व्यवहार किया था, यह भी तुमसे छिपा नहीं है॥ 28॥
 
Sanjay! You know very well how much trouble we had to bear because of the Kauravas in the past, however, out of respect for you, I can forgive all their crimes. How the Kauravas like Duryodhan have treated us in the past and how we behaved with them at that time is also not hidden from you.॥ 28॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)