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mahabharat 5.26.1: युधिष्ठिर बोले—संजय! तुमने मुझसे ऐसी कौन सी बात सुनी है जिससे मेरी युद्ध की इच्छा प्रकट हुई है, जिससे तुम युद्ध से भयभीत हो? हे प्रिये! युद्ध करने की अपेक्षा युद्ध न करना ही श्रेष्ठ है। सूत! युद्ध न करने का अवसर पाकर भी कौन मनुष्य युद्ध करेगा?॥1॥   |   mahabharat अध्याय 5.26: युधिष्ठिरका संजयको इन्द्रप्रस्थ लौटानेसे ही शान्ति होना सम्भव बतलाना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 26: युधिष्ठिरका संजयको इन्द्रप्रस्थ लौटानेसे ही शान्ति होना सम्भव बतलाना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  5.26.1 
युधिष्ठिर उवाच
कां नु वाचं संजय मे शृणोषि
युद्धैषिणीं येन युद्धाद् बिभेषि।
अयुद्धं वै तात युद्धाद् गरीय:
कस्तल्लब्ध्वा जातु युद्धॺेत सूत॥ १॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर बोले—संजय! तुमने मुझसे ऐसी कौन सी बात सुनी है जिससे मेरी युद्ध की इच्छा प्रकट हुई है, जिससे तुम युद्ध से भयभीत हो? हे प्रिये! युद्ध करने की अपेक्षा युद्ध न करना ही श्रेष्ठ है। सूत! युद्ध न करने का अवसर पाकर भी कौन मनुष्य युद्ध करेगा?॥1॥
 
Yudhishthira said— Sanjay! What have you heard from me that has shown my desire for war, due to which you are afraid of war? O dear! It is better not to fight a war than to fight a war. Suta! Which man would ever engage in war even after getting an opportunity not to fight?॥1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)