Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.25.8: धन्य हैं वे लोग जिन्होंने अपनी जाति और कुल के कल्याण के लिए साधन जुटाए हैं। वे ही पुत्र, मित्र और सम्बन्धी कहलाने के योग्य हैं। कौरवों को अपना निंदित जीवन त्याग देना चाहिए, जिससे कौरव कुल का उत्थान अवश्यंभावी हो जाए। 8॥ | mahabharat अध्याय 5.25: संजयका युधिष्ठिरको धृतराष्ट्रका संदेश सुनाना एवं अपनी ओरसे भी शान्तिके लिये प्रार्थना करना । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ते वै धन्या यै: कृतं ज्ञातिकार्यं
ते वै पुत्रा: सुहृदो बान्धवाश्च।
उपक्रुष्टं जीवितं संत्यजेयु-
र्यत: कुरूणां नियतो वैभव: स्यात्॥ ८॥
अनुवाद
धन्य हैं वे लोग जिन्होंने अपनी जाति और कुल के कल्याण के लिए साधन जुटाए हैं। वे ही पुत्र, मित्र और सम्बन्धी कहलाने के योग्य हैं। कौरवों को अपना निंदित जीवन त्याग देना चाहिए, जिससे कौरव कुल का उत्थान अवश्यंभावी हो जाए। 8॥
Blessed are those who have provided resources for the welfare of their caste and family. Only they are worthy of being called sons, friends and relatives. The Kauravas should give up their condemned life, so that the rise of the Kaurava clan becomes inevitable. 8॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥