श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 24: संजयका युधिष्ठिरको उनके प्रश्नोंका उत्तर देते हुए उन्हें राजा धृतराष्ट्रका संदेश सुनानेकी प्रतिज्ञा करना  »  श्लोक 9-10
 
 
श्लोक  5.24.9-10 
यन्माब्रवीद् धृतराष्ट्रो निशाया-
मजातशत्रो वचनं पिता ते॥ ९॥
सहामात्य: सहपुत्रश्च राजन्
समेत्य तां वाचमिमां निबोध॥ १०॥
 
 
अनुवाद
महाराज युधिष्ठिर! आप अपने मन्त्रियों और पुत्रों सहित मेरे इन शब्दों में वह सन्देश सुनें जो आपके चाचा धृतराष्ट्र ने कल रात्रि में मुझे दिया था।
 
Maharaj Yudhishthira! You, along with your ministers and sons, should listen to the message that your uncle Dhritarashtra had given me last night in these words of mine.
 
इति श्रीमहाभारते उद्योगपर्वणि सञ्जययानपर्वणि संजयवाक्ये चतुर्विंशोऽध्याय:॥ २४॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत उद्योगपर्वके अन्तर्गत संजययानपर्वमें संजयवाक्यविषयक चौबीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २४॥

 
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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