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mahabharat 5.24.3: आप लोगों ने दुर्योधन के प्रति कभी कोई द्वेष नहीं किया, फिर भी वह आपके प्रति जो क्रूर व्यवहार करता है, वह एक गद्दार के समान है। यह (दुर्योधन के लिए) उचित नहीं है। यदि वह आप जैसे साधु पुरुष से द्वेष करता है, तो राजा धृतराष्ट्र अपने पुत्रों सहित पापी और अपने मित्रों के प्रति द्रोही माने जाएँगे।   |   mahabharat अध्याय 5.24: संजयका युधिष्ठिरको उनके प्रश्नोंका उत्तर देते हुए उन्हें राजा धृतराष्ट्रका संदेश सुनानेकी प्रतिज्ञा करना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 24: संजयका युधिष्ठिरको उनके प्रश्नोंका उत्तर देते हुए उन्हें राजा धृतराष्ट्रका संदेश सुनानेकी प्रतिज्ञा करना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  5.24.3 
यद् युष्माकं वर्तते सौनधर्म्य-
मद्रुग्धेषु द्रुग्धवत् तन्न साधु।
मित्रध्रुक् स्याद् धृतराष्ट्र: सपुत्रो
युष्मान् द्विषन् साधुवृत्तानसाधु:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
आप लोगों ने दुर्योधन के प्रति कभी कोई द्वेष नहीं किया, फिर भी वह आपके प्रति जो क्रूर व्यवहार करता है, वह एक गद्दार के समान है। यह (दुर्योधन के लिए) उचित नहीं है। यदि वह आप जैसे साधु पुरुष से द्वेष करता है, तो राजा धृतराष्ट्र अपने पुत्रों सहित पापी और अपने मित्रों के प्रति द्रोही माने जाएँगे।
 
You people have never felt any hatred towards Duryodhan, yet the cruel behaviour he shows towards you is like that of a traitor. This is not right (for Duryodhan). If he hates a saintly person like you, then King Dhritarashtra along with his sons will be considered as a sinner and a traitor to his friends.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)