श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 24: संजयका युधिष्ठिरको उनके प्रश्नोंका उत्तर देते हुए उन्हें राजा धृतराष्ट्रका संदेश सुनानेकी प्रतिज्ञा करना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  5.24.1 
संजय उवाच
यथाऽऽत्थ मे पाण्डव तत् तथैव
कुरून् कुरुश्रेष्ठ जनं च पृच्छसि।
अनामयास्तात मनस्विनस्ते
कुरुश्रेष्ठान् पृच्छसि पार्थ यांस्त्वम्॥ १॥
 
 
अनुवाद
संजय ने कहा— हे कौरवश्रेष्ठ पाण्डुपुत्र! आपने मुझसे जो कुछ कहा है, वह सर्वथा सत्य है। आप कौरवों आदि के विषय में जो कुछ पूछ रहे हैं, वह मैं आपको बताता हूँ, सुनिए। पितामह! हे कुन्तीपुत्र! कुरुवंश के जिन महापुरुषों का कुशलक्षेम आपने पूछा है, वे सभी बुद्धिमान पुरुष स्वस्थ और सुखी हैं।॥1॥
 
Sanjaya said— O best of the Kurus, son of Pandu! Whatever you have told me is absolutely correct. Whatever you are asking about the Kauravas and the others, I will tell you, listen. Father! O son of Kunti! All the great men of the Kuru dynasty about whose well-being you have asked, all those intelligent men are healthy and happy.॥ 1॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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