श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 23: संजयका युधिष्ठिरसे मिलकर उनकी कुशल पूछना एवं युधिष्ठिरका संजयसे कौरवपक्षका कुशल-समाचार पूछते हुए उससे सारगर्भित प्रश्न करना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  5.23.8 
पितामहो न: स्थविरो मनस्वी
महाप्राज्ञ: सर्वधर्मोपपन्न:।
स कौरव्य: कुशली तात भीष्मो
यथापूर्वं वृत्तिरस्त्यस्य कच्चित्॥ ८॥
 
 
अनुवाद
तात! हमारे वृद्ध पितामह कुरुवंशी भीष्मजी, जो बुद्धिमान, परमज्ञानी और सभी धर्मों के ज्ञाता हैं, कुशल से तो हैं न? उनका स्नेह तो हमारे प्रति वैसा ही बना हुआ है न? 8॥
 
Tat! Our old grandfather Kuruvanshi Bhishmaji, who is wise, highly knowledgeable and full of knowledge of all religions, is well, isn't he? His affection towards us remains the same, isn't it? 8॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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