श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 23: संजयका युधिष्ठिरसे मिलकर उनकी कुशल पूछना एवं युधिष्ठिरका संजयसे कौरवपक्षका कुशल-समाचार पूछते हुए उससे सारगर्भित प्रश्न करना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  5.23.7 
चिरादिदं कुशलं भारतस्य
श्रुत्वा राज्ञ: कुरुवृद्धस्य सूत।
मन्ये साक्षाद् दृष्टमहं नरेन्द्रं
दृष्ट्वैव त्वां संजय प्रीतियोगात्॥ ७॥
 
 
अनुवाद
सूत! बहुत दिनों के बाद कुरुवंश में ज्येष्ठ महाराज धृतराष्ट्र के कुशल समाचार सुनकर और प्रेमपूर्वक आपका दर्शन पाकर मुझे ऐसा प्रतीत हो रहा है मानो मैंने आज महाराज धृतराष्ट्र को साक्षात् देखा हो॥7॥
 
Suta! Having heard after a long time the news of the well-being of Maharaja Dhritarashtra, the eldest among the Kuru clan, and having seen you with love, I feel as if I have seen Maharaja Dhritarashtra in person today. ॥ 7॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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