श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 23: संजयका युधिष्ठिरसे मिलकर उनकी कुशल पूछना एवं युधिष्ठिरका संजयसे कौरवपक्षका कुशल-समाचार पूछते हुए उससे सारगर्भित प्रश्न करना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  5.23.6 
युधिष्ठिर उवाच
गावल्गणे संजय स्वागतं ते
प्रीयामहे ते वयं दर्शनेन।
अनामयं प्रतिजाने तवाहं
सहानुजै: कुशली चास्मि विद्वन्॥ ६॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर बोले- संजय! गोपपुत्र! आपका स्वागत है। आपको देखकर हमें बहुत प्रसन्नता हुई। विद्वान्! मैं अपने भाइयों सहित कुशल से हूँ और आपको अपने स्वास्थ्य का समाचार दे रहा हूँ।
 
Yudhishthira said- Sanjay, son of the cowherds! You are welcome. We are very happy to see you. Scholar! I am fine along with my brothers and I am informing you about my health.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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