श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 23: संजयका युधिष्ठिरसे मिलकर उनकी कुशल पूछना एवं युधिष्ठिरका संजयसे कौरवपक्षका कुशल-समाचार पूछते हुए उससे सारगर्भित प्रश्न करना  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  5.23.25 
पुरा जेतुं नकुल: प्रेषितोऽयं
शिबींस्त्रिगर्तान् संजय पश्यतस्ते।
दिशं प्रतीचीं वशमानयन्मे
माद्रीसुतं कच्चिदेनं स्मरन्ति॥ २५॥
 
 
अनुवाद
संजय! प्रथम राजसूय यज्ञ में इसी नकुल को तुम्हारे सामने शिबि और त्रिगर्त देश के योद्धाओं को परास्त करने के लिए भेजा गया था; किन्तु इसने समस्त पश्चिम प्रदेश को परास्त करके मेरे अधीन कर दिया। क्या कौरवों को इस वीर माद्रीपुत्र का स्मरण भी है?॥25॥
 
Sanjay! In the first Rajasuya Yagna, this Nakula was sent in front of you to defeat the warriors of Sibi and Trigarta country; but he defeated the entire western region and brought it under my control. Do the Kauravas even remember this brave son of Madri?॥25॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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