श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 23: संजयका युधिष्ठिरसे मिलकर उनकी कुशल पूछना एवं युधिष्ठिरका संजयसे कौरवपक्षका कुशल-समाचार पूछते हुए उससे सारगर्भित प्रश्न करना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  5.23.22 
न चापश्यं कंचिदहं पृथिव्यां
योधं समं वाधिकमर्जुनेन।
यस्यैकषष्टिर्निशितास्तीक्ष्णधारा:
सुवासस: सम्मतो हस्तवाप:॥ २२॥
 
 
अनुवाद
मैंने इस पृथ्वी पर अर्जुन से श्रेष्ठ या उसके समान कोई योद्धा नहीं देखा; क्योंकि जब वह एक बार अपने हाथों से धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाता है, तो उसमें से सुन्दर पंख और तीक्ष्ण धार वाले इकसठ तीखे बाण निकलते हैं।
 
I have not seen any warrior on this earth better than Arjuna or equal to him; because when he once strings the bow with his hands, sixty-one sharp arrows with beautiful feathers and keen edges emerge from it.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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