Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.23.21: संजय! कौरवों को अर्जुन के वे बाण सदैव स्मरण रहते हैं, जो धनुष की डोरी को बार-बार हिलाकर और कानों तक खींचकर अंगुलियों के अग्रभाग से निशाना साधकर छोड़े जाते हैं और जो गाण्डीव धनुष से छूटकर मेघों की गर्जना के समान शब्द करते हुए सीधे लक्ष्य पर पहुँचते हैं, है न?॥ 21॥ | mahabharat अध्याय 5.23: संजयका युधिष्ठिरसे मिलकर उनकी कुशल पूछना एवं युधिष्ठिरका संजयसे कौरवपक्षका कुशल-समाचार पूछते हुए उससे सारगर्भित प्रश्न करना । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
संजय! कौरवों को अर्जुन के वे बाण सदैव स्मरण रहते हैं, जो धनुष की डोरी को बार-बार हिलाकर और कानों तक खींचकर अंगुलियों के अग्रभाग से निशाना साधकर छोड़े जाते हैं और जो गाण्डीव धनुष से छूटकर मेघों की गर्जना के समान शब्द करते हुए सीधे लक्ष्य पर पहुँचते हैं, है न?॥ 21॥
Sanjaya! The Kauravas always remember those arrows of Arjuna which are aimed with the tips of the fingers by repeatedly shaking the bowstring and pulling it up to the ears, and which are released from the Gandiva bow and reach the target directly making a sound like the roar of the clouds, don't they?॥ 21॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥