श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 23: संजयका युधिष्ठिरसे मिलकर उनकी कुशल पूछना एवं युधिष्ठिरका संजयसे कौरवपक्षका कुशल-समाचार पूछते हुए उससे सारगर्भित प्रश्न करना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  5.23.19 
कच्चिन्न पापं कथयन्ति तात
ते पाण्डवानां कुरव: सर्व एव।
द्रोण: सपुत्रश्च कृपश्च वीरो
नास्मासु पापानि वदन्ति कच्चित्॥ १९॥
 
 
अनुवाद
पिता संजय! क्या सभी कौरव पाण्डवों के किसी दोष की चर्चा कर रहे हैं? क्या द्रोणाचार्य और वीर कृपाचार्य अपने पुत्रों सहित हम पर कोई दोष लगा रहे हैं?॥19॥
 
Father Sanjaya! Are all the Kauravas discussing some fault of the Pandavas? Are Dronacharya and the brave Kripacharya along with their sons accusing us of any faults?॥ 19॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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