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श्लोक 5.23.19  |
कच्चिन्न पापं कथयन्ति तात
ते पाण्डवानां कुरव: सर्व एव।
द्रोण: सपुत्रश्च कृपश्च वीरो
नास्मासु पापानि वदन्ति कच्चित्॥ १९॥ |
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| अनुवाद |
| पिता संजय! क्या सभी कौरव पाण्डवों के किसी दोष की चर्चा कर रहे हैं? क्या द्रोणाचार्य और वीर कृपाचार्य अपने पुत्रों सहित हम पर कोई दोष लगा रहे हैं?॥19॥ |
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| Father Sanjaya! Are all the Kauravas discussing some fault of the Pandavas? Are Dronacharya and the brave Kripacharya along with their sons accusing us of any faults?॥ 19॥ |
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