श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 23: संजयका युधिष्ठिरसे मिलकर उनकी कुशल पूछना एवं युधिष्ठिरका संजयसे कौरवपक्षका कुशल-समाचार पूछते हुए उससे सारगर्भित प्रश्न करना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  5.23.17 
एतज्ज्योतिश्चोत्तमं जीवलोके
शुक्लं प्रजानां विहितं विधात्रा।
ते चेद् दोषं न नियच्छन्ति मन्दा:
कृत्स्नो नाशो भविता कौरवाणाम्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
ब्राह्मणों को दी गई जीविका रक्षा परलोक को प्रकाशित करने वाली उत्तम ज्योति है और इस चराचर जगत में उज्ज्वल यश फैलाने वाली है। स्वयं विधाता ने लोकहित के लिए यह विधान बनाया है। यदि मंदबुद्धि कौरव लोभवश ब्राह्मणों की जीविका का अपहरण करने की दुष्टता पर नियंत्रण नहीं रखेंगे, तो कौरव कुल का सर्वनाश हो जाएगा। 17॥
 
The livelihood protection given to Brahmins is the best light that illuminates the next world and it is going to spread bright fame in this living world. The Creator himself has created this rule for the benefit of the people. If the dull-witted Kauravas do not control the evil of hijacking the livelihood of Brahmins out of greed, then the Kaurava clan will be completely destroyed. 17॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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