श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 23: संजयका युधिष्ठिरसे मिलकर उनकी कुशल पूछना एवं युधिष्ठिरका संजयसे कौरवपक्षका कुशल-समाचार पूछते हुए उससे सारगर्भित प्रश्न करना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  5.23.16 
कच्चिद् राजा धृतराष्ट्र: सपुत्र
उपेक्षते ब्राह्मणातिक्रमान् वै।
स्वर्गस्य कच्चिन्न तथा वर्त्मभूता-
मुपेक्षते तेषु सदैव वृत्तिम्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
क्या राजा धृतराष्ट्र अपने पुत्रों सहित ब्राह्मणों के प्रति किए गए अपराधों की उपेक्षा करते हैं? जो कार्य ब्राह्मणों को सदैव दिया जाता है, वही स्वर्ग प्राप्ति का मार्ग है; इसलिए क्या राजा उस कार्य की उपेक्षा या अवहेलना करते हैं?॥16॥
 
Does King Dhritarashtra along with his sons ignore the crimes committed against the brahmanas? The job which is always given to the brahmanas is the way to reach heaven; therefore, does the king ignore or disregard that job?॥ 16॥
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