श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 23: संजयका युधिष्ठिरसे मिलकर उनकी कुशल पूछना एवं युधिष्ठिरका संजयसे कौरवपक्षका कुशल-समाचार पूछते हुए उससे सारगर्भित प्रश्न करना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  5.23.12 
कच्चिन्मानं तात लभन्त एते
धनुर्भृत: कच्चिदेतेऽप्यरोगा:।
येषां राष्ट्रे निवसति दर्शनीयो
महेष्वास: शीलवान् द्रोणपुत्र:॥ १२॥
 
 
अनुवाद
तात! क्या उपर्युक्त धनुर्धर विद्वान उन कौरवों में सम्मान पाते हैं जिनके देश में अद्भुत, रूपवान और महान धनुर्धर द्रोणपुत्र अश्वत्थामा रहते हैं? क्या ये कौरव भी स्वस्थ हैं? 12॥
 
Tat! Do the above mentioned archer scholars get respect among those Kauravas in whose country Ashwatthama, the son of Drona, a wonderful, graceful and great archer, lives? Are these Kauravas also healthy? 12॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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