श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 23: संजयका युधिष्ठिरसे मिलकर उनकी कुशल पूछना एवं युधिष्ठिरका संजयसे कौरवपक्षका कुशल-समाचार पूछते हुए उससे सारगर्भित प्रश्न करना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  5.23.10 
स सोमदत्त: कुशली तात कच्चिद्
भूरिश्रवा: सत्यसंध: शलश्च।
द्रोण: सपुत्रश्च कृपश्च विप्रो
महेष्वासा: कच्चिदेतेऽप्यरोगा:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
तात! सोमदत्त, भूरिश्रवा, सत्यप्रतिज्ञ शल, द्रोणाचार्य अपने पुत्र के साथ और विप्रश्रेष्ठ कृपाचार्य - क्या ये महान धनुर्धर और योद्धा स्वस्थ हैं, है ना? 10॥
 
Tat! Somdutt, Bhurishrava, Satyapratigya Shala, Dronacharya with his son and Viprashrestha Kripacharya - are these great archers and warriors healthy, aren't they? 10॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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