श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 23: संजयका युधिष्ठिरसे मिलकर उनकी कुशल पूछना एवं युधिष्ठिरका संजयसे कौरवपक्षका कुशल-समाचार पूछते हुए उससे सारगर्भित प्रश्न करना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  5.23.1 
वैशम्पायन उवाच
राज्ञस्तु वचनं श्रुत्वा धृतराष्ट्रस्य संजय:।
उपप्लव्यं ययौ द्रष्टुं पाण्डवानमितौजस:॥ १॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायन कहते हैं: जनमेजय! राजा धृतराष्ट्र की बात सुनकर संजय महाबली पांडवों से मिलने उपप्लव्य के पास गये।
 
Vaishmpayana says: Janamejaya! On hearing the words of King Dhritarashtra, Sanjaya went to Upaplavya to meet the illustrious Pandavas.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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