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mahabharat 5.22.6-7: वे अपने मित्रों को आवश्यकता पड़ने पर सहायता के लिए धन देते हैं। दीर्घकाल तक रहने पर भी उनकी मित्रता क्षीण नहीं होती। कुन्तीपुत्र सभी के साथ उचित आदर का व्यवहार करते हैं। हम अजमीढ़ वंश के कौरवों की ओर से पापी, बेईमान और मंदबुद्धि दुर्योधन और अत्यंत क्षुद्र स्वभाव वाले कर्ण के अतिरिक्त किसी का उनसे कोई बैर नहीं है। संजय! मेरा पुत्र दुर्योधन काल का ग्रास बन गया है; क्योंकि उसकी बुद्धि मोह से मलिन हो गई है। वह मूर्ख अत्यंत तेजस्वी और महान पाण्डवों की संपत्ति हड़पने का प्रयत्न कर रहा है। सुख और प्रियजनों से वियोगी महाबुद्धिमान पाण्डवों के मन में दुर्योधन और कर्ण ही क्रोध उत्पन्न करते रहते हैं।   |   mahabharat अध्याय 5.22: धृतराष्ट्रका संजयसे पाण्डवोंके प्रभाव और प्रतिभाका वर्णन करते हुए उसे संदेश देकर पाण्डवोंके पास भेजना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 22: धृतराष्ट्रका संजयसे पाण्डवोंके प्रभाव और प्रतिभाका वर्णन करते हुए उसे संदेश देकर पाण्डवोंके पास भेजना  »  श्लोक 6-7
 
 
श्लोक  5.22.6-7 
त्यजन्ति मित्रेषु धनानि काले
न संवासाज्जीर्यति तेषु मैत्री।
यथार्हमानार्थकरा हि पार्था-
स्तेषां द्वेष्टा नास्त्याजमीढस्य पक्षे॥ ६॥
अन्यत्र पापाद् विषमान्मन्दबुद्धे-
र्दुर्योधनात् क्षुद्रतराच्च कर्णात्।
(पुत्रो मह्यं मृत्युवशं जगाम
दुर्योधन: संजय रागबुद्धि:।
भागं हर्तुं घटते मन्दबुद्धि-
र्महात्मनां संजय दीप्ततेजसाम्॥ )
तेषां हीमौ हीनसुखप्रियाणां
महात्मनां संजनयतो हि तेज:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
वे अपने मित्रों को आवश्यकता पड़ने पर सहायता के लिए धन देते हैं। दीर्घकाल तक रहने पर भी उनकी मित्रता क्षीण नहीं होती। कुन्तीपुत्र सभी के साथ उचित आदर का व्यवहार करते हैं। हम अजमीढ़ वंश के कौरवों की ओर से पापी, बेईमान और मंदबुद्धि दुर्योधन और अत्यंत क्षुद्र स्वभाव वाले कर्ण के अतिरिक्त किसी का उनसे कोई बैर नहीं है। संजय! मेरा पुत्र दुर्योधन काल का ग्रास बन गया है; क्योंकि उसकी बुद्धि मोह से मलिन हो गई है। वह मूर्ख अत्यंत तेजस्वी और महान पाण्डवों की संपत्ति हड़पने का प्रयत्न कर रहा है। सुख और प्रियजनों से वियोगी महाबुद्धिमान पाण्डवों के मन में दुर्योधन और कर्ण ही क्रोध उत्पन्न करते रहते हैं।
 
They give money to their friends for their help in times of need. Even long stays do not weaken their friendship. Kunti's sons treat everyone with due respect. On the side of us Kauravas of Ajamidh lineage, no one has enmity towards them except the sinful, dishonest and dull-witted Duryodhana and the extremely petty-natured Karna. Sanjay! My son Duryodhana has fallen prey to time; because his intellect is polluted by attachment. That fool is trying to usurp the property of the extremely brilliant and great Pandavas. Only Duryodhana and Karna keep creating anger in the minds of the great-minded Pandavas who are separated from happiness and loved ones. 6-7.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)