Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.22.4: सर्वदा खोजते रहने पर भी मुझे कुन्तीपुत्रों में ऐसा कोई दोष नहीं मिला जिससे मैं उनकी निन्दा कर सकूँ। वे सदैव धर्म और अर्थ के लिए अपने कर्तव्यों का पालन करते हैं। वे कामवश मोह और स्त्री-पुत्रादि पदार्थों में नहीं उलझते। वे विषय-भोगों में आसक्त होकर धर्म का परित्याग नहीं करते। ॥4॥ | mahabharat अध्याय 5.22: धृतराष्ट्रका संजयसे पाण्डवोंके प्रभाव और प्रतिभाका वर्णन करते हुए उसे संदेश देकर पाण्डवोंके पास भेजना । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
सर्वदा खोजते रहने पर भी मुझे कुन्तीपुत्रों में ऐसा कोई दोष नहीं मिला जिससे मैं उनकी निन्दा कर सकूँ। वे सदैव धर्म और अर्थ के लिए अपने कर्तव्यों का पालन करते हैं। वे कामवश मोह और स्त्री-पुत्रादि पदार्थों में नहीं उलझते। वे विषय-भोगों में आसक्त होकर धर्म का परित्याग नहीं करते। ॥4॥
Despite searching for it all the time, I have not found any fault in the sons of Kunti that would make me criticise them. They always perform their duties for the sake of Dharma and Artha. They do not get entangled in mental affections and things like wives and children out of desire. They do not abandon Dharma by getting engrossed in sensual pleasures. ॥ 4॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥