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mahabharat 5.22.39-40: क्योंकि श्रीकृष्ण उसे अपनी आत्मा के समान प्रिय हैं। श्रीकृष्ण विद्वान हैं और सदैव पाण्डवों के कल्याण में लगे रहते हैं। संजय! तुम पाण्डवों और वहाँ एकत्रित संजयकुल के क्षत्रियों का तथा मेरी ओर से श्रीकृष्ण, सात्यकि, राजा विराट और द्रौपदी के पाँचों पुत्रों का भी कुशलक्षेम पूछो। इसके अतिरिक्त जो भी अवसर हो और जो तुम्हें भरतकुल के लिए हितकर लगे, वैसी ही बातें पाण्डव पक्ष के लोगों से कहो। राजाओं के बीच कोई ऐसी बात न कहो, जिससे उनका क्रोध बढ़े और युद्ध का कारण बने। 39-40।   |   mahabharat अध्याय 5.22: धृतराष्ट्रका संजयसे पाण्डवोंके प्रभाव और प्रतिभाका वर्णन करते हुए उसे संदेश देकर पाण्डवोंके पास भेजना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 22: धृतराष्ट्रका संजयसे पाण्डवोंके प्रभाव और प्रतिभाका वर्णन करते हुए उसे संदेश देकर पाण्डवोंके पास भेजना  »  श्लोक 39-40
 
 
श्लोक  5.22.39-40 
प्रियश्चैषामात्मसमश्च कृष्णो
विद्वांश्चैषां कर्मणि नित्ययुक्त:।
समानीतान् पाण्डवान् सृंजयांश्च
जनार्दनं युयुधानं विराटम्॥ ३९॥
अनामयं मद्वचनेन पृच्छे:
सर्वांस्तथा द्रौपदेयांश्च पञ्च।
यद् यत् तत्र प्राप्तकालं परेभ्य-
स्त्वं मन्येथा भारतानां हितं च।
तद् भाषेथा: संजय राजमध्ये
न मूर्च्छयेद् यन्न च युद्धहेतु:॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
क्योंकि श्रीकृष्ण उसे अपनी आत्मा के समान प्रिय हैं। श्रीकृष्ण विद्वान हैं और सदैव पाण्डवों के कल्याण में लगे रहते हैं। संजय! तुम पाण्डवों और वहाँ एकत्रित संजयकुल के क्षत्रियों का तथा मेरी ओर से श्रीकृष्ण, सात्यकि, राजा विराट और द्रौपदी के पाँचों पुत्रों का भी कुशलक्षेम पूछो। इसके अतिरिक्त जो भी अवसर हो और जो तुम्हें भरतकुल के लिए हितकर लगे, वैसी ही बातें पाण्डव पक्ष के लोगों से कहो। राजाओं के बीच कोई ऐसी बात न कहो, जिससे उनका क्रोध बढ़े और युद्ध का कारण बने। 39-40।
 
Because Shri Krishna is dear to him like his own soul. Shri Krishna is learned and is always engaged in the welfare of the Pandavas. Sanjaya! You should ask about the health of the Pandavas and the Kshatriyas of the Sanjaya clan gathered there and also Shri Krishna, Satyaki, King Virat and the five sons of Draupadi on my behalf. Apart from this, whatever the occasion may be and which you feel is beneficial for the Bharata clan, say such things to the people of the Pandava side. Do not say any such words among the kings, which may increase their anger and become the reason for war. 39-40.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)