Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.22.31: जिनके अग्ररक्षक वृष्णिवंशी सिंह भगवान वासुदेव हैं, उन पाण्डवों के आक्रमण का कोई भी शत्रु सामना नहीं कर सकता। यह सुनकर कि श्रीकृष्ण और अर्जुन एक ही रथ पर आरूढ़ हुए हैं, मेरा हृदय भय से काँप रहा है॥31॥ | mahabharat अध्याय 5.22: धृतराष्ट्रका संजयसे पाण्डवोंके प्रभाव और प्रतिभाका वर्णन करते हुए उसे संदेश देकर पाण्डवोंके पास भेजना । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न जातु ताञ्छत्रुरन्य: सहेत
येषां स स्यादग्रणीर्वृष्णिसिंह:।
प्रवेपते मे हृदयं भयेन
श्रुत्वा कृष्णावेकरथे समेतौ॥ ३१॥
अनुवाद
जिनके अग्ररक्षक वृष्णिवंशी सिंह भगवान वासुदेव हैं, उन पाण्डवों के आक्रमण का कोई भी शत्रु सामना नहीं कर सकता। यह सुनकर कि श्रीकृष्ण और अर्जुन एक ही रथ पर आरूढ़ हुए हैं, मेरा हृदय भय से काँप रहा है॥31॥
No enemy can ever withstand the attack of the Pandavas whose vanguard is Lord Vasudeva, the lion of Vrishni. Hearing that Shri Krishna and Arjuna have assembled on one chariot, my heart trembles with fear. ॥ 31॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥