श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 22: धृतराष्ट्रका संजयसे पाण्डवोंके प्रभाव और प्रतिभाका वर्णन करते हुए उसे संदेश देकर पाण्डवोंके पास भेजना  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  5.22.30 
पराक्रमं मे यदवेदयन्त
तेषामर्थे संजय केशवस्य।
अनुस्मरंस्तस्य कर्माणि विष्णो-
र्गावल्गणे नाधिगच्छामि शान्तिम्॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
संजय! मेरे गुप्तचरों ने मुझे पाण्डवों के लिए श्रीकृष्ण के पराक्रम का वर्णन किया था। हे ग्वाल! श्रीहरि के उन पराक्रम का बार-बार स्मरण करने से मुझे शान्ति नहीं मिल रही है।
 
Sanjaya! My spies had told me about the heroic deeds of Shri Krishna for the Pandavas. O cowherd! I am unable to find peace by repeatedly recalling those heroic deeds of Shri Hari. 30.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)